कलयुग के राजा - बाबा खाटू श्याम

श्रीमद् भागवत के मतानुसार जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान श्री हरि विष्णु साकार रूप धारण कर दीन-हीन भक्तजन, साधु एवं सज्जन पुरुषों का उद्धार तथा पाप कर्म में प्रवृत्त रहने वालों का विनाश कर धर्म की स्थापना किया करते हैं। उनके अवतार ग्रहण करने का न तो कोई निश्चित समय होता है और न ही कोई निश्चित रूप। धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि को देखकर जिस समय वे अपना अवतरित होना आवश्यक समझते हैं, तभी अवतरित हो जाते हैं। ऐसे कृपालु भगवान के पास अपने भक्तों के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता। परंतु सच्चा भक्त कोई विरला ही होता है। यद्यपि उस सच्चिदानंद स्वरूप श्री हरि के भक्तों की विभिन्न कोटियां होती हैं। श्री हरि विष्णु के भक्तों की इसी कोटि में पांडव कुलभूषण भीमसेन के पौत्र एवं महाबली घटोत्कच के पुत्र, मोरवी नंदन, वीर शिरोमणी बर्बरीक भी आते हैं जो अनेक नामों से जाने जाते हैं। लेकिन कलयुग के राजा होने की उपाधि विष्णु अवतार श्री कृष्ण ने उन्हें प्रदान की है।

Kalyug ke raja - baba khatu shyam
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अंतर आत्मा की आवाज़

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