03. तनाव को संभालना सीखें

ऊँ
श्री गणेशाय नम्ः
श्री श्याम देवाय नम्ः

वेदों में तनाव दूर करने के लिए ध्यान और विश्रांति दोनों को जरूरी बताया गया है। यहां विश्रांति का अर्थ है, आंखें बंद कर दिमाग में सभी प्रकार के विचारों को आने जाने देना। निरंतर अभ्यास से कुछ दिनों बाद स्वयऺ विचार आने बंद हो जाते हैं, और मस्तिष्क शांत हो जाता है। हमारे जीवन में जब भी कोई बदलाव होता है, तो हमारा शरीर उसे लेकर जो प्रतिक्रिया करता है , उसे ही हम तनाव कहते हैं। क्योंकि हमारे जीवन में लगातार बदलाव होते रहते हैं, जैसे लक्ष्य को पूरा करने का प्रेशर नौकरी जाने का डर, किसी काम को तय समय पर पूरा न कर पाने का दबाव या उसे सही से न कर पाना आदि ऐसे में तनाव से बचना मुश्किल है। ऐसे में हमारा उद्देश्य  सभी तरह के तनाव को खत्म करना नहीं होना चाहिए क्योंकि यह संभव नहीं है, हां हमें अनावश्यक तनाव को दूर करने के साथ ही इसे बेहतर तरीके से मैनेज करने के प्रयास करने चाहिए।

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में गला काट प्रतिस्पर्धा है। हर कोई आगे बढ़ने में लगा हुआ है ।ऐसे में तनाव सामान्य बात है। लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी तरह के तनाव का शिकार है। हालांकि किसी भी तरह का तनाव हमारे मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है ।ऐसे में हम कह सकते हैं की किसी भी वास्तविक अथवा काल्पनिक डर, घटना अथवा बदलाव की वजह से हमारा दिमाग और शरीर जो प्रतिक्रिया करता है, वह तनाव कहलाता है। तनाव का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे तमाम कारण होते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम किसी भी घटना को लेकर किस तरह की प्रतिक्रिया करते हैं और यह आपकी सोच आपकी पर्सनेलिटी और मौजूदा संसाधनों पर निर्भर करता है ।किसी व्यक्ति के लिए कोई स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है तो वही स्थिति दूसरे व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। जब हमें बड़ी अथवा अप्रत्याशित असफलता मिलती है तो हम तनाव में आ जाते हैं ।इसके अलावा कई लोग अपनी नौकरी, रिश्तों, वित्तीय स्थिति, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आदि को लेकर तनाव में रहते हैं। इन तनावों का सामना करने का कौशल सीख कर हम अपने तनाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं ।

तनाव दूर करने का सबसे अच्छा तरीका वह है जो आपको शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के तनाव से निजात दिलाएं ।जब हम बेहद तनाव में होते हैं तो हमें शारीरिक थकावट के साथ साथ मानसिक थकावट भी होने लगती है ।तब मन में यही सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति में क्या किया जाए ?तो इसका एक बेहतरीन उपाय हैं,ध्यान जो ऐसी स्थिति में शारीरिक और मानसिक रूप से हमें मजबूत करता है। जब आप ध्यान लगाएंगे तो आपको आंतरिक सुकून का अनुभव होगा। ध्यान लगाना भी एक कला है ।जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति इसे एक ही तरीके से करें। आप अलग-अलग तरीके से भी से कर सकते हैं।मेडिटेशन करने के लिए मन को सुकून देने वाले संगीत का चयन कर सकते हैं। सितार वीणा बांसुरी यह कोई ऐसा ही मन को शांति देने वाला वादन से जुड़ा संगीत सुन सकते हैं ।इस दौरान आप आंखें बंद करे और अपना सारा ध्यान सिर्फ संगीत की ध्वनि पर केंद्रित करें ।इससे आप काफी हल्का महसूस करेंगे।मेडिटेशन आपके शरीर में सकारात्मकता लाता है। यदि आप नियमित रूप से मेडिटेशन करते हैं, तो आपके दिमाग में तनाव के कारण जो अंजाना- सा डर हावी रहता है, उसको काफी हद तक मैनेज करने में सहायता मिलेगी।

हमें अपना जीवन वर्तमान में रहकर जीना चाहिए। हमें भविष्य को लेकर तमाम तरह की चिंताएं और पुराने समय को लेकर पछतावा करने से तमाम तरह के तनाव का शिकार हो जाते हैं, और वर्तमान का आनंद नहीं उठा पाते, ऐसे में सिर्फ वर्तमान में फोकस करें और तनाव रहित जिंदगी जीने का मजा ले। गृह स्थ धर्म का पालन करने वाले लोग वेद पढ़ कर तनाव दूर कर सकते हैं ।इसके लिए उन्हें कमरे में नहीं बल्कि शांत- शीतल वातावरण में बैठकर वेदों का अध्ययन करना चाहिए। वेदों का अध्ययन करने से व्यक्ति में ऐसे संस्कार जागृत हो जाते हैं, जिससे वह न सिर्फ सकारात्मकता और आत्मविश्वास जैसे सद्गुणों से परिपूर्ण हो जाता है, बल्कि निरंतर लक्ष्य पथ पर चलते हुए परम लक्ष्य को भी हासिल कर लेता है। “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र बोलने से भी शांति मिलती है, वेद बताते हैं कि कोई भी काम उसका समय आने पर भी होता है, इसीलिए प्रतिस्पर्धा की बजाए हृदय को बड़ा करके रखना चाहिए।

हम जो भोजन करते हैं जनकल्याण के भाव के साथ ग्रहण करना ज्यादा लाभदायक होता है, साथ ही हमें यह विचार मन में अवश्य लाना चाहिए कि जो हम ग्रहण कर रहे हैं वह ब्रह्म का ही अंश है। यह भोजन, संस्कृति समाज, देश, सभ्यता के रक्षण- पोषण के लिए किया जा रहा है। जब हम इस तरह के भोजन को ग्रहण करना सीख जाएंगे तो हमारे शरीर में सकारात्मक हार्मोन उत्पन्न होंगे, जिससे हमारे दिमाग में सकारात्मक विचारों का उद्गम होगा और हमारे देखने का, सोचने का नजरिया बदल जाएगा।हम पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करने लगेंगे। अब हमारी प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाएगी और हम एक अच्छी जिंदगी जीने लगेंगे। जिससे तनाव नामक राक्षस हमारे आसपास भी नहीं फटकेगा, जिससे हम तनाव को मैनेज करना सीख लेंगे।

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