10. सहनशक्ति का महत्व

ऊँ
श्री गणेशाय नम्ः
श्री श्याम देवाय नम्ः

सहनशक्ति का अपना ही महत्व है। हर इंसान में सहन करने की शक्ति अलग-अलग होती है।किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व उसकी सहनशक्ति पर निर्भर करता है। उसमें बर्दाश्त करने की ताकत जितनी बढ़ती जाएगी उसका व्यक्तित्व उतना निखरता चला जाएगा ।उसमें धैर्य का विकास होगा ।वह विकट स्थिति में भी अपने कार्य को आसानी से अंजाम तक पहुंचा सकता है। सहनशक्ति वह गुण है ,जिससे व्यक्ति सफलता के शीर्ष को स्पर्श कर सकता है। यह गुण हमारी आत्मिक शक्ति को सफलता प्रदान करता है। यह चारित्रिक परिष्कार का कारक है। सहनशील  व्यक्ति के भीतर अथाह सामर्थ्य का भंडार संग्रहित होता है। सहनशीलता सद् विचारों एवं सत्संगति के प्रभाव से ही आती है। अच्छे विचार सहन शक्ति में वृद्धि करते हैं। सत्संगती भी संयम के जन्म का कारक है। अच्छे परिवेश, भद्रजनों के सामीप्य से सहनशील व्यक्ति में प्राण वायु का संचार होता है।सहन शक्ति एक ऐसा गुण है, जो इस नश्वर शरीर को अमरता प्रदान करता है। क्योंकि मनुष्य को सद्कार्यों के लिए उद्वेलित करता है। यह नकारात्मकता को पास नहीं फटकने देता। सहनशील व्यक्ति एवम् नकारात्मक विचारों का आपस में बैर है।

जब साहस के साथ सहनशीलता और शिष्टाचार जुड़ जाता है, तो वह व्यक्ति अनूठा हो जाता है अर्थात व्यक्ति में अनूठेपन के लिए सहनशक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है।व्यक्ति में मौलिक विशिष्टता उसकी सहनशक्ति से पोषित होती रहती है। पश्चिमी विचारक रूसो से जब  सहनशक्ति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि-सहन शक्ति मनुष्य के जीवन में नई रोशनी उत्पन्न कर देती है। स्पष्ट है कि सहनशीलता में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को प्रकाशवान बना सके। जिसमें सहनशक्ति नहीं है वह गुस्से में अपना कार्य खराब कर लेता है ।कभी-कभी हम गुस्से में दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं ।मगर समय बीतने के बाद पता चलता है, कि हमने अपने आपको ज्यादा नुकसान पहुंचाया है ।सहनशक्ति की कमी के कारण हम उस सांप की भांति हैं, जो गुस्से में अपने आपका जीवन खत्म  कर लेता।है।

एक बार की बात है ,कि एक बंद दुकान में कहीं से घूमता फिरता एक सांप घुस गया। दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप मामूली सा जख्मी हो गया। घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताकत से डंक मार दिया, जिस कारण उसके मुंह से खून बहना शुरू हो गया ।अबकी बार सांप ने अपने व्यवहार के अनुसार आरी से लिपट कर उसे जकड़ कर और दम घोंटकर मारने की पूरी कोशिश कर डाली।अब सांप अपने गुस्से की वजह से पूरी तरह घायल हो गया ।दूसरे दिन जब दुकानदार ने दुकान खोली तो सांप को आरी से लिपटा मरा हुआ पाया ।जो किसी और कारण से नहीं बल्कि अपनी तैश और गुस्से की भेंट चढ़ गया था। सहनशक्ति जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। हमें अपनी जिंदगी सुचारू रूप से चलाने के लिए कभी-कभी कुछ चीजों को, कुछ लोगों को, कुछ घटनाओं को, कुछ कामों को ,और कुछ बातों को इग्नोर करना चाहिए। अपने आपको मानसिक मजबूती के साथ इग्नोर करने का आदी जरूर बनाइए। जरूरी नहीं हम हर एक्शन का एक रिएक्शन दिखाएं । सहनशक्ति ऐसी सवारी है ,जो अपने सवार को गिरने नहीं देती ना किसी के कदमों में, ना किसी की नजरों में।

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