122. जीवन का उद्देश्य

श्री गणेशाय नमः

श्री श्याम देवाय नमः

मनुष्य जीवन एक अमूल्य ईश्वरीय देन है। जीवन का उद्देश्य इस संसार में जन्म लेकर सिर्फ अपनी सांसे पूरी कर इस दुनिया को अलविदा कहना मात्र नहीं है बल्कि यह जीवन तो इतिहास बनाने का नाम है। यह एक ऐसा मंच है, जहां पर मनुष्य अपना हर सपना पूरा कर इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अपना नाम दर्ज करवा सकता है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को इसे सार्थक बनाने का हर संभव प्रयास करना चाहिए।
जीवन को सार्थक बनाने के लिए यह परम आवश्यक है कि सबसे पहले अपने जन्म के उद्देश्य को पहचान कर उसका अनुसरण करें। किसी भी मनुष्य का जन्म एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए होता है। हमें उसी उद्देश्य को तलाशना होगा, जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें यह मानव शरीर प्राप्त हुआ है। यहां तक की ईश्वर ने भी विशिष्ट उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही मानव शरीर धारण किया है।

किसी भी मानव के लिए उसके जीवन के दो दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। एक वह जिस दिन वह जन्म लेता है और दूसरा वह, जिस दिन उसे अपने जन्म के उद्देश्य का भान हो जाता है। हमारा हमेशा यह प्रयास होना चाहिए कि हम अपने जीवन का मकसद तलाशकर अपनी क्षमतानुसार परिश्रम करते हुए उस लक्ष्य को हासिल करें जो हमारे लिए निर्धारित है, अन्यथा उद्देश्य विहीन जीवन का कोई अर्थ नहीं होता।

वास्तव में मानव जीवन की सार्थकता त्याग की भावना से जीवन जीने और दूसरे के दुख को दूर करने में निहित है। दूसरों के लिए प्रकाश की एक किरण बनना सबसे बड़ा सुख है। वास्तव में देखा जाए तो हमारा जीवन हर क्षेत्र में त्याग से जुड़ा हुआ है। जन्म लेने के बाद मां द्वारा अपनी हर इच्छा का त्याग करने के बाद ही हम अपना वृक्ष रुपी जीवन जी पाते हैं और अपने आकाश जितनी ऊंचाई वाले बड़े- बुजुर्गों के साएं में उनको अपना बागवां मानते हुए जीवन रूपी नैया को पार ले जाने में सफल हो पाते हैं। इन सब के लिए भगवान श्री राम जी जैसा त्याग होना आवश्यक है। मानव सेवा का वृत लेने से बढ़कर कोई दूसरा वृत मीठा फल देने वाला नहीं है।

कहा गया है कि— त्याग से तप, तप से भोग और भोग से राज। यही जीवन का सार है। त्याग की महिमा का कोई अंत नहीं है। हम अपने जीवन से भी बहुत कुछ प्राप्त कर सकते हैं। मां के साएं में रहकर बहुत कुछ सीखते हैं। यह सत्य है की त्याग रुपी जीवन जीने से, अंतिम समय में हम अपना जीवन सुखमय, भक्तिमय और करुणामय बना पाते हैं।
प्रख्यात लेखक स्वेट मार्डन कहते हैं कि— जो दूसरों के दुखी एवं अंधकारमय जीवन में सुख का प्रकाश पहुंचाते हैं, उनका नाम सदैव संसार में रहेगा। ऐसे लोग अमर होते हैं।

ऐसे में समय पर यह आभास होना आवश्यक है कि मनुष्य जीवन कुछ अच्छा करने के लिए मिला है। इसलिए हमें सजग हो जाना चाहिए कि यह जीवन कहीं व्यर्थ न चला जाए। जीवन को सार्थक बनाने के लिए हमें अपने भीतर की ऊर्जा का उपयोग सार्थक एवं उचित लक्ष्यों के लिए करना चाहिए क्योंकि मनुष्य जीवन की सार्थकता उद्देश्य पूर्ण जीवन जीने में है।

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