172. जीवन परिवर्तनशील है

श्री गणेशाय नमः

श्री श्याम देवाय नमः

परिवर्तन प्रकृति का नियम है। जिस प्रकार प्रकृति में परिवर्तन होता है, कभी गर्मी होती है तो कभी सर्दी, उसी प्रकार जीवन में हर समय परिवर्तन होता रहता है जो निरंतर चलता रहता है। यह कभी नहीं रुकता। सारी सृष्टि परिवर्तनशील है।

डार्विन का एक सिद्धांत है— “सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट” जीवन परिवर्तनशील है, जिसके कारण निरंतर नए प्रकार के जीवन का विकास होता रहता है। जो जीव अपने को समकालीन वातावरण के अनुकूल ढाल लेते हैं, वे जीवन के विकास क्रम में आगे बढ़ जाते हैं और अधिक दिनों तक स्थाई बने रहते हैं। इसके विपरीत जो अपने को वातावरण के अनुकूल नहीं बना पाते, वे जीव जीवन के विकास क्रम में पिछड़ जाते हैं और जीवन की रेस में अपने आप को बनाए नहीं रख पाते हैं।

आज कोरोनावायरस की वजह से हमारी जिंदगी भी परिवर्तित हुई है। हमारे खाने का ढंग बदल गया। हमारा घूमना-फिरना बंद हो गया। जिन्होंने अपने को इस वातावरण में ढाल लिया, वे जीवन में ओर बेहतर करने के लिए आगे बढ़ गए लेकिन बहुत से लोगों की जिंदगी वहीं पर रुक गई, जो नहीं रुके, उन्होंने घर में बंद होकर भी कुछ न कुछ नया किया है।
कहने का तात्पर्य यही है कि— जिनकी जिंदगी रुक गई, उनके जीवन में नकारात्मकता आ गई लेकिन जिसने कुछ करने की ठान ली, वे आज भी सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

सकारात्मक शक्ति के द्वारा हम अपने जीवन में आए हुए इस परिवर्तन को भी आसानी से पार कर सकते हैं। हां यह मुश्किल वक्त जरूर है। आज के समय हम में से प्रत्येक का कोई न कोई अपना हॉस्पिटल में जन्म और मृत्यु के बीच झूल रहा है। कोरोनावायरस ने उनको आई- सी-यू में जाने पर मजबूर किया हुआ है लेकिन फिर भी अच्छे विचार, अच्छी आदतें और अपने आराध्य पर विश्वास हमारे भीतर आशा का संचार करते हैं। जो जीवन की परीक्षा को सही आकार देते हैं। ऐसे भाव जब निरंतर हमारे मानस पटल पर तरंगित होंगे तो स्वाभाविक रूप से हम सब जीवन की परीक्षा को आत्मसात् कर सकेंगे।

आज हमें सिर्फ इतना करना है कि— नकारात्मकता को अपने मन में घर नहीं करने देना चाहिए ताकि जीवन के एक पड़ाव पर सफलता न मिलने से या एक छोटे से वायरस की वजह से हमारे जीवन में जो परिवर्तन हुआ, उसके कारण हमारा संघर्षमय जीवन व्यर्थ न हो जाए। निसंदेह ऐसी निराशा से ऊपर उठना आसान नहीं होगा‌। हमें सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है। कभी सफलता आपकी दासी होती है तो कभी असफलता सामने आकर हमें चिढ़ाती है।

प्रकृति का शाश्वत नियम है कि— दोनों स्थितियां एक साथ विद्यमान नहीं रहती। समस्याओं का मुकाबला करने से ही उन पर विजय प्राप्त की जा सकती है। सकारात्मक शक्ति ही नकारात्मकता पर प्रहार कर, हमारे जीवन को सही दिशा देने में सक्षम होती है। हमें यह समझना होगा कि हर प्राणी की तरह, हमने भी अपना जीवन शुन्य से शुरू किया था। समय के साथ अपनी लगन और परिश्रम से उसका फल अवश्य प्राप्त होगा। ठीक है, आज समय हमारे अनुसार नहीं है। इसलिए तमाम प्रयासों के बावजूद सफलता न मिलने पर निराशा और अवसाद के शिकार हो रहे हैं‌। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है
कि समय परिवर्तित नहीं होगा। जीवन यात्रा रूपी पथ पर मनुष्य प्राचीन काल से संघर्ष करता रहा है।
इतिहास साक्षी है कि— सकारात्मक सोच ने ही तमाम साधारण जनों को असाधारण बनाने का कार्य किया है।

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