204. समस्याओं से लड़ने की ऊर्जा— ध्यान

श्री गणेशाय नमः

श्री श्याम देवाय नमः

ध्यान करने से हमारे जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन होते हैं, जिससे हमें समस्याओं से लड़ने की ऊर्जा प्राप्त होती है। प्रत्येक मनुष्य आमतौर पर तनाव ग्रस्त रहता है। उसके जीवन में कोई न कोई परेशानी आती ही रहती है। मानसिक तनाव, भावनाओं का उतार-चढ़ाव, क्रोध, निराश होना, अवसाद महसूस करना, हमेशा भयभीत रहना आदि, ये सब कुछ कोरोना की दूसरी लहर के बाद लोगों में देखने-सुनने को मिल रहे हैं। इससे संबंधित शिकायतों की बाढ़- सी आई हुई है।

बहुत सारे मनुष्य जो कोरोना से ठीक हो कर वापिस घर आ गए थे, वे भी काफ़ी भयभीत हैं, क्योंकि उनमें से काफी सारे मनुष्य कोरोना से ठीक होने के पश्चात् भी दो से तीन महीने के अंदर ही काल का ग्रास बन चुके हैं। किसी को ब्रेन हेमरेज हो रहा है तो किसी का हर्ट फेल हो जाता है। ऐसे में किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा।

आज लोगों का न सिर्फ मानसिक बल्कि भावनात्मक एवं शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, हृदय रोग जैसी बीमारियों में वृद्धि हुई है। कोरोना से उबर चुके बहुत से मनुष्य मानसिक और शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। वे आज ऐसे विकल्पों की तलाश में हैं जो उन्हें तन के साथ-साथ मन को भी सुकून प्रदान करें। ऐसे में ध्यान ही एक ऐसी चमत्कारी दवा है, जिसके प्रभाव से वह अपने तन और मन दोनों को स्वस्थ रख सकते हैं।

मुश्किलें हमेशा हमारी हिम्मत और समझदारी की परीक्षा लेने के लिए ही आती हैं। ऐसे समय में जो मनुष्य हिम्मत का दामन छोड़ देते हैं और समझदारी का परिचय नहीं देते, वही मनुष्य बेहद निराश होकर अवसाद में चले जाते हैं। हमारी चिंताएं बेवजह की होती हैं। बहुत से बीमार मनुष्य यही सोचने लगते हैं कि उनके संसार में से चले जाने के बाद उनके परिवार का क्या होगा? जब वे आर्थिक संकट से गुजरते है तो वे उनका हल खोजने के बजाय निराशा के गर्त में जाने लगते हैं। सच्चाई तो यही है कि जीवन समस्याओं की एक श्रृंखला है। हमें बड़ी समझदारी, धैर्य और हिम्मत से काम लेना चाहिए और यह तीनों ध्यान के अभ्यास से ही आ सकती हैं।

ध्यान हमारी समस्याओं का खात्मा नहीं करता। ऐसा नहीं है कि ध्यान करने से हमारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी बल्कि ध्यान तो हमें आनंद के ऐसे स्थान पर ले जाता है, जहां पर हम उन समस्याओं के कष्टदायी प्रभावों को महसूस नहीं करते। हमारे अंदर समस्याओं से लड़ने की ऊर्जा पैदा कर देता है। हमारा जीवन को देखने का दृष्टिकोण बदल देता है। जिससे हम यह समझ जाते हैं कि परेशानियां अस्थाई होती हैं। आज हैं, कल नहीं रहेंगी। जिससे हमारे अंदर हिम्मत और धैर्य उत्पन्न होता है और हम अधिक मजबूत होकर समस्या से उभर पाते हैं।

हावर्ड की न्यूरोसाइंटिस्ट सारा लेजर कहती है— ध्यान ब्रेन के चार हिस्सों— लेफ्ट हिप्पकैंपस, पोस्टेरियर, सिंगुलेट, पान्स एवं द् टेंपेरो पेरिएटल जंक्शन पर गहरा प्रभाव डालता है। इससे सोचने की शक्ति बढ़ जाती है। दिमाग की क्षमता बढ़ जाती है। एकाग्रता आती है। किसी कार्य पर अधिक फोकस कर पाते हैं।

वैज्ञानिक शोध के अनुसार— मानव मस्तिष्क में दिन में 60 से 70000 से भी अधिक विचार उत्पन्न होते हैं। जिनमें नकारात्मक, फिजूल विचार अधिक होते हैं। ध्यान दिमाग में चल रहे विचारों पर विराम लगा कर उसे शांत करने में मदद करता है।

जिस प्रकार किसी पौधे के बढ़ने के लिए उसकी जड़ों में पानी डाला जाता है न की पत्तों में, वैसे ही हमें मन को शांत करने के लिए, अपने संकल्पों को श्रेष्ठ एवं सकारात्मक बनाने के लिए अपनी आंतरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति को जगाना होगा। जब हम मन का, ईश्वर के साथ संबंध स्थापित कर लेंगे तो हमें एक ऐसी ऊर्जा प्राप्त होगी जो सब परेशानियों से बाहर निकलने में हमारी सहायता करेगी।

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